बीस मिनट - सौ मील - एक शर्त - अध्याय 10 — दूसरी ट्रायल रेस

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एक महीना बीत चुका था। सुबह की सड़कें अभी पूरी तरह जागी नहीं थीं। नील दौड़ रहा था—कंधों से चिपकी पसीने में भीगी शर्ट, कदमों की ताल स्थिर। साँसें अब बिखरती नहीं थीं; भीतर जातीं और बाहर आतीं, गिनती में। उसने कलाई घुमाकर स्टॉपवॉच देखी—लैप टाइम पिछली बार से बेहतर था। थकान थी, पर नियंत्रण भी। वह एक जूसवाले की दुकान पर रुका। गन्ने की मशीन घूम रही थी। नील ने गिलास थामा, दो घूँट लिए, और तभी उसे लगा—भीड़ में कोई उसे देख रहा है। नज़र उठी। एक पल के लिए कोई साया दिखा… फिर लोग खिसक गए, साया