धोखाधड़ी करने वाले विक्रेता: हिस्सा-3 (अनन्त का अभिशाप)'अनंत विंटेज पैलेस' को सील किए हुए छह महीने बीत चुके थे। दुकान के लोहे के दरवाज़ों पर लगी सरकारी मुहर पर धूल जम चुकी थी, लेकिन बनारस की गलियों में सन्नाटा अब भी उस दुकान के पास आकर गहरा हो जाता था। लोग उस रास्ते से गुजरने से कतराते थे, क्योंकि अक्सर रात के सन्नाटे में वहॉं से किसी के पत्थर घिसने की आवाज़ें आती थीं, जैसे कोई आज भी वर्कशॉप में नक़ली गहने तराश रहा हो।रहस्य की नई दस्तक:-शहर में एक नया जॉंच अधिकारी आया, राजन। राजन तार्किक और विज्ञान में भरोसा रखने