शहद की गुड़िया - रंजन कुमार देसाई (91)

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                 शहद की गुड़िया - प्रकरण 91         " उस के बाद गरिमा ने उस के चरित्र के बारे में लोगो को सच्चाई से अवगत किया था. गौरवने भी उस की प्रशंसा के पुल बांधे थे."       " उस वक़्त बच्चा नीला की गोद में सोया  हुआ था."        " स्नेहा अपने आंसू रोक नहीं पा रही थी."        " बिभूति उसे अपनी गोद में बिठाकर प्यार की वर्षा क़र रही थी. "          " उस वक़्त एक ही शख्स इस सभा में मौजूद नहीं था और वह था हसमुख. उस ने संभव का सब कुछ छिन लिया था . भगवान ने उस के कुकर्मो