इन गुड फ़ेथ

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                   सन उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन किशोर अपने पैतृक गांव से लौटा था।जहां वह दसवीं की अपनी परीक्षा के बाद हुई लंबी छुट्टियों में कुछ दिन के लिए गया रहा था।                    “वहां मुझे वह मिली थीं,” घर में घुसते ही उस ने मां को जा घेरा।                     अपने दफ़्तर के लिए तैयार हो रहे प्रमिला के हाथ रुक लिए।                     बिना पूछे ‘