दो पतियों की लाडली पत्नी - 28

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रात के 2 बजे। बाहर तेज़ हवा चल रही है। घर में गहरा सन्नाटा है।श्रेया अचानक घबरा कर उठ बैठती है। चेहरे पर पसीना… साँस तेज़-तेज़ चल रही है।श्रेया (रोते हुए, काँपती आवाज़ में) बोली - कर… करन जी… मुझे कबीर जी के पास जाना है… मुझे डर लग रहा है…।करन उठता है। आँखों में नींद है पर चेहरा बेहद सख्त।करन (धीरे पर कड़े लहजे में) बोला - श्रेया… रात बहुत हो चुकी है।तुम्हारा सपना बस सपना था।कबीर को सोते हुए डिस्टर्ब मत करो।श्रेया (और जोर से रोने लगती है) —नहीं… मुझे उससे मिलना है…मुझे उसके पास जाना ही होगा…मुझे उससे गले