उनकी हालत अब ऐसी हो चुकी थी कि वे तीन लोग नहीं रहे थे एक ही साँस में बँधे तीन दिल बन गए थे।अब अगर चोट एक को लगती, तो कराह तीनों के भीतर उठती। अगर आँसू एक की आँख से गिरते,तो दिल दो और के भीग जाते।दोपहर का समय था। तीनों छत पर बैठे थे। हल्की धूप थी, मगर मन में अजीब-सी बेचैनी। कबीर पानी लेने उठा। सीढ़ियों से उतरते समय उसका पैर फिसला।आह!आवाज़ छोटी थी, मगर असर गहरा। कबीर ज़मीन पर बैठ गया, उसके पैर से खून रिसने लगा। उसी पल—श्रेया का दिल धक से रह गया। वह