दो पतियों की लाडली पत्नी - 56

(162)
  • 1.8k
  • 978

अगले दिन सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी।श्रेया की नींद धीरे-धीरे खुली। उसने हल्का सा हिलना चाहा, पर उसे महसूस हुआ कि वह दोनों तरफ से किसी की बाहों में घिरी हुई है।उसने आँखें खोलीं…और जो उसने देखा, उससे उसका दिल एक पल के लिए थम गया। वह करन के सीने से लगी हुई थी। करन की बाँहें उसे ढके हुए थीं, जैसे वह उसे हर डर से बचा लेना चाहता हो। उसकी साँसें शांत थीं, पर उसके चेहरे पर थकान साफ झलक रही थी।वहीं पीछे से…कबीर उसकी पीठ से चिपका हुआ था।उसकी एक बाँह श्रेया की