हमारे सभ्य समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी प्रकार से अपनी आजिविका कमाने के लिए प्रयासरत है। कुछ विशेष प्रवृति के प्राणी भी हमारे इसी समाज में पाये जाते हैं जो दिन-भर कुछ नहीं करते पर फिर भी उनकी जीवन की गाड़ी हिचकोले लेती हुई चलती रहती हैं। ऐसे ही एक महापुरूष इस कहानी के मुख्य प्रात्र श्रीमान हरीश चन्द्र माथुर जी है जिन्हें प्यार से घरवाले हन्सु पुकारतें है। कद-काठी से तो कोई विशेष व्यक्त्वि है नहीं इनका, छोटे कद के दरम्याने शरीर के है। रंग कुछ गेहुआं कह सकते हैं। हमारे और नौजवानों की भांति ये भी