थोड़े उजाले, थोड़े अँधेरे के बीच में `उड़ियो पँख पसार नीलम कुलश्रेष्ठ जिस तरह हवा हरे पत्तों को सहलाती ,इठलाती वातावरण नम करती है या बारिश की इक बूँद किसी पत्ते पर थरथराती है। थोड़ा उजाला ,थोड़ा अँधेरा एक रहस्य उत्पन्न करता है या शब्दों के अम्बार में कुछ शब्द किसी अलौकिक शक्ति की भक्ति ,मंत्रोच्चार के बीच उठते हुए धुँये से अनिवर्चनीय आत्मिक शांति की बात करते हैं , ऐसी हैं निशा चंद्रा की कहानियों की भाषा उनके पांचवे कहानी संग्रह`उड़ियो पंख पसार `की। थोड़ी हैरानी ये है कि जिनके चार कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं जिनमें दो