कर्मपथ – आत्मा की पुकार

(116)
  • 2.1k
  • 2
  • 696

कर्मपथ – आत्मा की पुकारभाग–1 : एक नई सुबहसूरज की पहली किरणें गाँव के खेतों पर बिखर रही थीं। हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू थी और मंदिर की घंटियों की ध्वनि वातावरण को पवित्र बना रही थी। यह गाँव सुंदर तो था, लेकिन वर्षों से गरीबी, अशिक्षा और निराशा से घिरा हुआ था।इसी गाँव में रहती थी आराध्या। उसके पिता एक छोटे किसान थे और माँ गाँव की महिलाओं को सिलाई सिखाकर परिवार का सहारा बनती थीं। बचपन से ही आराध्या पढ़ाई में तेज थी, लेकिन उसकी सबसे बड़ी विशेषता थी—दूसरों का दुःख अपना समझना।जब दूसरे बच्चे बड़े शहरों