ऐसे बरसे सावन - 31

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उधर हॉल में बैठे बैठे स्वास्तिक बार बार घड़ी को निहारने में लगा रहता है तभी कॉल बेल बजती हैं.....अभिराम के पिता - अभी, बेटा दरवाज़ा पर देखो कौन आया है lजैसे ही कॉल बेल बजती हैं वैसे ही स्वास्तिक को लगता है जैसे उसके दिल की घंटी बज गयी हो ....उतावले पन में वह अभिराम से कहता है, "तू बैठ मैं देखता हूं l"बहुत खुश होते हुए बालों को थोड़ा सेट करते हुए जाकर दरवाज़ा खोलता हैं पर दरवाजे पर आए व्यक्ति को देखकर उसका सारा का सारा मूड ऑफ हो जाता हैं lअभिराम के पिता - कौन हैं