वह सबसे नाराज़ थी—अपने भाइयों से भी और उस पूरे हालात से भी, जिसने उसे अंदर तक हिला दिया था।उस रात घर में किसी ने खाना नहीं खाया।शिवाय इसी उधेड़बुन में घर से पैदल निकल पड़ा था। उसके मन में बार-बार यही सवाल उठ रहा था कि कहीं उसने शक्ति के साथ कुछ ज़्यादा बेरुखी तो नहीं दिखा दी।रात अब और गहरी हो चुकी थी।अस्सी घाट लगभग खाली हो गया था। घाट की सीढ़ियों पर पसरा सन्नाटा और गंगा के पानी में तैरते छोटे-छोटे दीये पूरे माहौल को एक अलग ही शांति दे रहे थे।शक्ति सीढ़ियों पर चुपचाप बैठी उन