माँ की आखिरी पुकार एक बेटे की जिद, एक माँ का मंगलसूत्र और एक परिवार की दर्दनाक कहानी«“कुछ पुकारें कानों तक पहुँचती हैं…लेकिन कुछ पुकारें सीधे आत्मा को चीर जाती हैं।”»एक सच्ची घटना से प्रेरित सामाजिक कथा───भाग – 1 : सपनों से भरी आँखेंकुणाल केवल सोलह वर्ष का था।उसकी आँखों में उम्र से कहीं बड़े सपने थे।दसवीं की परीक्षा में उसने 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। परिवार को उस पर गर्व था। माँ रिश्तेदारों से बड़े विश्वास के साथ कहती—“मेरा बेटा डॉक्टर बनेगा…”पिता भी बेटे के भविष्य को लेकर सपने देखते थे।घर में जब कुणाल की पढ़ाई की