अर्थ - अनर्थ यह श्लोक महाभारत का नहीं है। यह एक आधुनिक संस्कृत पहेली (riddle) या लोक-व्युत्पत्ति (folk etymology) है, , गीताप्रेस संस्करण या किसी प्रामाणिक महाभारत पाठ में यह श्लोक नहीं मिलता। व्यास-गणेश संवाद की प्रसिद्ध कथा (जहाँ गणेश बिना रुके लिखते हैं और व्यास गूढ़ श्लोक बोलकर समय लेते हैं) महाभारत के आदि पर्व के कुछ परंपरागत आख्यानों में है, केशवं पतितं दृष्ट्वा द्रोणो हर्षमुपागतः। कौरवाः सर्वे रुदन्ति हा! हा! केशव! केशवः॥ सम्पूर्ण महाभारत में कृष्ण तो कहीं गिरे नहीं और अगर कहीं गिर भी गये हों तो कृष्ण को गिरते देखकर द्रोण हर्ष से क्यों