समय के साथ...रितांश और सिद्धिदात्री का रिश्ता और भी गहरा होता जा रहा था। शुरुआत में जो सिर्फ दोस्ती थी...वह कब प्यार में बदल गई, शायद उन्हें खुद भी पता नहीं चला। अब रितांश ऑफिस से लौटते ही सबसे पहले सिद्धिदात्री को ढूँढता। और सिद्धिदात्री...दिन में न जाने कितनी बार बिना किसी कारण के रितांश को फोन कर देती। रितांशी तो उन्हें देखकर अक्सर चिढ़ाती रहती थी।वो बोली - आप दोनों शादी ही कर लो अब!यह सुनकर दोनों शर्म से लाल हो जाते। एक रात कृष्णा और सिद्धिका अपने कमरे की बालकनी में बैठे थे। हल्की ठंडी हवा चल रही थी।