अम्मा की तोरई और स्पेसशिप का गियर'सूं-सूं... खटर-पटर...'पिंकू पांडे उस पतले, अंधेरे लोहे के पाइप के अंदर अपने घुटनों और कोहनियों के बल रेंग रहे थे। कंधे का गमछा अब उनके मुँह पर बंधा हुआ था ताकि धूल मुँह में न जाए। बनारस की तंग गलियों में छुपकर भागने का अनुभव आज अंतरिक्ष में पिंकू के बहुत काम आ रहा था। पिंकू पांडे बस सरपट आगे की ओर बढ़ते जा रहे थे। पाइप में घुप्प अंधेरा था पिंकू पांडे की हालत पतली हो गई थी पर हिम्मत करके बाबा भोलेनाथ का नाम लेते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ने लगे।पिंकू पांडे:(मन