कर्ज़ की डायरी

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सुरेश विदर्भ के एक छोटे से गाँव का गरीब किसान था। उसके पिता की दो साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। पिता अपने पीछे दो एकड़ बंजर जमीन और ऊपर से पाँच लाख रुपये का कर्ज़ छोड़ गए थे। यह कर्ज़ गाँव के साहूकार हरिराम से लिया गया था।सुरेश ने दिन-रात खेत में मेहनत की, पर पैदावार इतनी नहीं होती थी कि घर चल सके और कर्ज़ भी चुक सके। उसकी पत्नी सुनीता ने तो अपने सारे गहने तक बेच दिए थे, फिर भी साहूकार का ब्याज बढ़ता ही जा रहा था। साहूकार हर हफ्ते उसके दरवाजे पर