त्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालूत्रिशूल और गंगाजल के स्पर्श ने कालू के भीतर के राक्षस को मार दिया था। अब ज़मीन पर तड़प रहा वह जीव 'कालू' नहीं, बल्कि वही मासूम कल्याण सिंह था।उसके चेहरे पर अब क्रोध नहीं, बल्कि एक असीम शांति थी।कार्तिक उसके पास घुटनों के बल बैठ गया। कल्याण सिंह ने कांपते हुए हाथ से कार्तिक का हाथ थामा और धुंधली आवाज़ में बोला, "धन्यवाद... भाई। तुमने मुझे उस अंधेरे से निकाल लिया। मेरी माँ... क्या मेरी माँ मुझे मिल जाएगी?"कार्तिक ने आँखों में आँसू लिए कहा, "हाँ कल्याण, तेरी माँ नदी के उस पार