सोहन के हाथ आर्यमन के कंधे से ढीले पड़ गए। नीलम भाभी के चेहरे पर अब एक विजयी मुस्कान वापस आ गई थी, जैसे उन्हें वही मिल गया हो जो वो चाहती थीं।आर्यमन एकदम पत्थर बन गया था। न उसने उसे पीछे धकेला, न ही गले लगाया। वह बस सुन्न खड़ा रहा।तभी नीलम भाभी ने जलती पर तेल डालते हुए कहा, "देखा अवनि? देखा सोहन? मैंने कहा था न कि आर्यमन का अतीत और भविष्य दोनों एक ही है।पहचान लो अवनि, ये और कोई नहीं... यही श्रद्धा है! हमारे आर्यमन की जान, उसका पहला और आखिरी प्यार।"श्रद्धा ने आर्यमन के