रात के 9 बज रहे थे। ऑफिस की लाइटें एक-एक करके बंद हो रही थीं। 1 महीने का प्रोजेक्ट अब 5 दिन में पूरा करना था, इसलिए सब थक कर घर जा चुके थे।सिर्फ एक चेयर पर अभी भी लाइट जल रही थी। वहाँ जैन बैठी थी। उसकी आँखें लैपटॉप पर थीं, पर मन कहीं और था। म्याओ की वो बात - "अपनी जिद त्याग दो" - उसके दिल में चुभ रही थी। उसे लग रहा था कि म्याओ उससे नाराज है।तभी पीछे से किसी के कदमों की आवाज आई।"तुम अभी तक घर नहीं गई?"जैन ने चौंक कर पीछे देखा।