राखी का वह छोटा-सा डिब्बा

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राखी का वह छोटा-सा डिब्बा कभी-कभी रिश्ते गरीबी और अमीरी से नहीं टूटते…उन्हें तोड़ देती है हमारी सोच।एक भाई था, जो बचपन में अपनी छोटी बहन के लिए जान तक न्योछावर करने को तैयार रहता था।दोनों साथ खेलते थे, साथ खाते थे और एक-दूसरे के बिना एक पल भी नहीं रहते थे।फिर समय बदला…भाई अमीर होता गया और बहन की जिंदगी गरीबी में डूबती चली गई।जिस बहन के लिए भाई कभी कहता था—“तू मेरी जान है…”,उसी बहन को एक दिन उसके ही घर में उसकी लाई हुई मिठाई के लिए “भिखारी जैसी मिठाई” सुनना पड़ा।लेकिन जिंदगी की कहानी यहीं खत्म