काहिरा के रेगिस्तानी इलाके में रात का गहरा सन्नाटा था। बंद पड़ी सीमेंट फैक्ट्री के अंदर पीली बत्तियों की रोशनी में दर्जनों लोग अत्याधुनिक हथियार और हेरोइन के पैकेट बड़े-बड़े कंटेनरों में सील कर रहे थे।ऊंचे मचान पर खड़ा पाकिस्तान का अरबपति बिजनेसमैन हमदान मीर सिगार पीते हुए नीचे देख रहा था। तभी भारी लोहे का गेट खुला और दो नकाबपोश अंदर दाखिल हुए—दावर और उसका साथी तारिक।दोनों सीधे हमदान के मचान के नीचे पहुंचे। दावर ने नकाब थोड़ा नीचे किया और मिस्री अरबी में बात शुरू की।दावर"مساء الخير يا حمدان بيه... الشغل ماشي زي ما اتفقنا؟"(Masaa el-kheir ya Hamdan