दो रोटी का कर्ज़

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मोहन शहर के एक बड़े होटल में वेटर का काम करता था। उसकी तनख्वाह सिर्फ 8000 रुपये थी। इतने कम पैसों में वह अपनी पत्नी, छोटे बच्चे और बूढ़ी माँ का पेट किसी तरह पाल रहा था। मालिक अक्सर उसे डांटता रहता था, पर मोहन सब चुपचाप सह लेता था।एक सर्दी की रात, होटल बंद होने के बाद मोहन घर लौट रहा था। रात के 11 बज चुके थे और कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। रास्ते में फुटपाथ पर उसे एक बूढ़ा आदमी कंबल के बिना ठिठुरता हुआ मिला। उसकी हालत बहुत खराब थी।मोहन ने पूछा, "बाबा, यहाँ क्यों