एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 6

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भाग ६ — जब जिम्मेदारियाँ फिर लौट आईंमिहिर को लगा था कि अब सब कुछ धीरे-धीरे ठीक होने लगेगा।पिछली रात परिवार के साथ हुई बातचीत ने उसके मन का बहुत बड़ा बोझ हल्का कर दिया था।उसे पहली बार महसूस हुआ था कि उसकी खामोशी को भी कोई सुन सकता है।लेकिन जिंदगी हमेशा हमारी उम्मीद के मुताबिक नहीं चलती।कुछ दिनों तक घर का माहौल सचमुच बदल गया।माँ छोटी-छोटी बातों में मिहिर से सलाह लेने के बजाय खुद फैसले लेने लगीं।पापा भी अब हर खर्च और हर जिम्मेदारी मिहिर के सामने नहीं रखते थे।निशा तो जैसे मिहिर को समझने की कोशिश में