एक पुरुष—सबके बीच अकेला - 10

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भाग १० — किसके लिए जिऊँ?मिहिर अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठा बहुत देर तक सोचता रहा।उसके हाथ में मोबाइल था।स्क्रीन पर कंपनी का मैसेज खुला हुआ था।“Please confirm your joining date.”एक नौकरी…जिसकी उसे इस समय सबसे ज्यादा जरूरत थी।लेकिन वही नौकरी उसे अपने परिवार से दूर ले जाने वाली थी।मिहिर ने मोबाइल बंद कर दिया।वह वापस पापा के कमरे में गया।पापा सो रहे थे।माँ उनके पास बैठी थीं।निशा खिड़की के पास खड़ी थी।मिहिर को देखते ही उसने पूछा—“क्या फैसला किया?”मिहिर ने धीमी आवाज में कहा—“अभी नहीं पता।”निशा उसके पास आई।“तुम्हें क्या लगता है?”मिहिर ने उसकी तरफ देखा।“अगर मैं चला गया