एक दिन गाँव के सबसे बड़े सेठ पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसका इकलौतो बेटो अचानक गुजर गओ।सेठ के घर कोहराम मच गया। औरतन के रोने की आवाज दूर तक सुनाई दे रही थी। सेठ का तो रो-रोकर बुरा हाल था। वो उसको इकलौता सहारा हतों , व सेठ को तो पूरा संसार ही खत्म हो गयो I उस जमाने में गाँव में एक पुरानी रीति थी। अगर काऊ की मौत शाम में हो जाए, तो अंतिम संस्कार अगले दिन भोर में किया जाता था। पर लाश पूरी रात घर में नई रखी जाती थी I लोग अर्थी को उठाकर श्मशान