अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 64 : अर्णव का सचलाल आसमान के नीचे वह जंगल अचानक हजारों काली परछाइयों से भर गया था।पेड़ों पर लटके कागज़ जल रहे थे।हवा में उड़ते हुए अधूरे पन्ने चारों तरफ घूम रहे थे।और उन सबके बीच अर्णव अकेला खड़ा था।उसके सामने भक्षक की काली परछाईं थी।अनन्या, नैना, आरव और कबीर उसके पीछे खड़े थे।अनन्या ने घबराकर पूछा—"अर्णव, ये सब क्या है?"अर्णव ने उसकी तरफ देखे बिना कहा—"मेरी दुनिया।""और ये परछाइयाँ?"अर्णव ने धीमे स्वर में कहा—"मेरी अधूरी यादें।"अनन्या चौंकी।"यादें?"अर्णव ने सिर हिलाया।"जब माँ ने मुझे कहानी से बाहर किया था, तो सिर्फ मेरा नाम नहीं