जिंदगी की दूसरे किनारा - 34

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जिंदगी की दूसरा किनारा पाठ 34और वही बीच आंगन में मैच के सामने सोफे पर बैठे हुए डॉक्टर देव की माता-पिता हंसते हुए और एक दूसरे से बातें करते हुए उसकी मां हंसते हुए उसके पिता से कहती है बस भी करो जी और तभी अचानकबात करते हुए वो नजरे घुमा कर अपने बेटे की तरफ देखा है और अचानक उसे देखते हुए हंसना छोड़  ठहर जाता हैऔर वही अचानक डॉक्टर हेड अपनी बेटी को भागते देख  सोचने लगता है कि क्या हुआ और मुस्कुराना छोड़ उसका पूरा ध्यान अपने बेटे पर टिक जाता हैऔर वही ज्योति अपने बेटे को भागते हुए जाते देखा अचानक से मुस्कुराना छोर हॉकी अपने बेटे की तरफ हाथ