अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 65 : असली लेखकपूरा घर अचानक अंधेरे में डूब गया।एक पल पहले तक दीवारों पर चमकती सुनहरी रोशनी थी, लेकिन अब चारों तरफ सिर्फ काला सन्नाटा था।अनन्या ने तुरंत नैना का हाथ पकड़ लिया।"नैना?""मैं यहीं हूँ, दीदी।"आरव ने अंधेरे में आवाज लगाई—"सब लोग साथ रहना!"कबीर की आवाज आई—"कोई अपनी जगह से मत हिलना।"लेकिन अर्णव...वह बिल्कुल शांत खड़ा था।उसकी नजर उस सफेद पन्ने पर थी जो कुछ देर पहले आसमान से गिरा था।उस पर सिर्फ एक वाक्य लिखा था—"मैं लौट आई हूँ।"अर्णव धीरे-धीरे उस पन्ने के पास गया।उसने उसे उठाया।जैसे ही उसकी उँगलियाँ पन्ने को छूती