एपिसोड 67— कबीर कौन है? कमरे में अचानक ऐसी खामोशी छा गई, जैसे पूरी दुनिया ने अपनी साँस रोक ली हो। सफेद गलियारे के बीचों-बीच कबीर खड़ा था। उसके सामने उसकी माँ थी। और माँ की आँखों में डर था। ऐसा डर, जिसे अनन्या ने पहले कभी नहीं देखा था। कबीर ने धीरे से अपनी निगाहें उठाईं। “बहुत देर हो गई, माँ।” उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं था। बल्कि एक अजीब-सी थकान थी। अनन्या ने एक कदम आगे बढ़ाया। “कबीर... तुमने अभी क्या कहा?” कबीर ने उसकी तरफ