एपिसोड 47 — शक की पहली दरारसुबह के करीब आठ बजे City Hospital की इमारत हमेशा की तरह मरीजों और डॉक्टरों की भीड़ से भरी हुई थी।कॉरिडोर में नर्सें तेजी से एक वार्ड से दूसरे वार्ड जा रही थीं। कहीं मरीज के परिजन परेशान खड़े थे, तो कहीं डॉक्टर अपनी टीम को निर्देश दे रहे थे।लेकिन इन सबके बीच अर्जुन वशिष्ठ का चेहरा आज कुछ अलग था।वह हमेशा की तरह शांत था, लेकिन उसकी आंखों में एक अजीब-सी बेचैनी थी।कल रात रohan की कही हुई एक बात बार-बार उसके दिमाग में घूम रही थी।“नासिर खान की मौत से पहले रघुवीर