सुबह का समय — हवा में धुंध, जंगल के पेड़ों के बीच से सूरज की किरणें छनकर आ रही हैं।सिया और कबीर हाथों में मशाल लिए सावधानी से चलते हुए जंगल से बाहर निकल रहे हैं।चारों तरफ़ पक्षियों की आवाज़ें हैं, पर माहौल में अब भी डर और रहस्य है।)सिया (धीरे से, चलते हुए) बोली - “कबीर जी… अब हम कहाँ जा रहे हैं?”कबीर (गंभीर आवाज़ में) बोला - “अब हमें पता लगाना है कि ये ज़ॉम्बी आए कहाँ से।जब तक उनकी जड़ नहीं मिलेगी, तब तक ये खत्म नहीं होंगे।”(सिया उसकी ओर देखती है — उसके चेहरे पर दृढ़ निश्चय साफ