विराट ने कार का रुख घर की तरफ नहीं, बल्कि शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक पुराने, सुनसान हिल स्टेशन की ओर मोड़ दिया। वहाँ उसका एक पुराना दोस्त, डॉ. आर्यन, रहता था—एक ऐसा मनोचिकित्सक जो कानूनी उलझनों से दूर, गोपनीयता (confidentiality) को सर्वोपरि मानता था और जिस पर विराट आँख मूंदकर भरोसा कर सकता था।रास्ते भर संयोगिता बेहोश रही। विराट ने बीच-बीच में उसे चेक किया, उसके माथे से खून के सूखे छिलकों को साफ़ किया और उसे पानी के छींटे मारे ताकि वह होश में आए, लेकिन वह गहरी नींद में सोई रही। यह नींद उसके लिए