खाना खाने के बाद, संयोगिता की आँखों में एक अजीब सी थकान थी। वह थकान सिर्फ शारीरिक नहीं थी, बल्कि उसकी रूह की थी। सालों तक जागते रहने, डरते रहने और मारते रहने के बाद, उसे पहली बार 'सुरक्षित' महसूस हो रहा था।विराट ने धीरे से उसे तकिये पर लिटाया। संयोगिता ने करवट बदली और विराट की बांहों के बीच अपनी जगह बना ली। उसका सिर विराट के सीने पर था, और उसका एक हाथ विराट की कमीज को मुट्ठी में भींचे हुए था—बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई बच्चा अपनी माँ को पकड़ता है, या कोई प्रेमी अपने सहारे को।विराट