तुम मिले, जब मैं खुद से बिछड़ गई - 3

(16)
  • 837
  • 1
  • 231

विहान कुछ देर तक फोन की स्क्रीन को देखता रहा।स्क्रीन पर वही संदेश था—“कुछ कहानियाँ शुरू होने से पहले ही एक-दूसरे से जुड़ चुकी होती हैं।”वह कुर्सी पर पीछे टिक गया।कमरे में हल्की-सी खामोशी थी। खिड़की के बाहर सड़क पर गाड़ियों की आवाज़ आ रही थी, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था।उसने संदेश को दोबारा पढ़ा।फिर धीरे से फोन टेबल पर रख दिया।“अजीब है…”विहान ने खुद से कहा।उसे समझ नहीं आ रहा था कि किसी अनजान व्यक्ति को उसकी लिखी हुई बातों के बारे में कैसे पता हो सकता है।तभी कमरे का दरवाज़ा खुला।“भाई?”कबीर अंदर आया और हाथ में चाय