कागज़ की नावमणिकर्णिका पर मौत कभी छुट्टी नहीं लेती।लोग कहते हैं यहाँ चिता की आग में भी ठंडक है, क्योंकि यहाँ सबको मुक्ति मिलती है।वहाँ हवा में राख है, पानी में प्रार्थना है, और हर कोने में एक कहानी जल रही है।उस घाट के सबसे कोने में शिव बैठता था। उम्र 29, पर आँखें 90 साल की लगती थीं।सामने टोकरी में सफ़ेद कागज़, हाथ में फेविकोल, और आँखों में एक अजीब सी शांति।हर कोई अपनों को जलाने आता था, शिव उनकी अधूरी इच्छाओं को जलने से बचाने आता था।वो कागज़ की नाव बनाता था और गंगा में छोड़ देता था।लोग