"राजकुमारी नेत्र अपनी मां के कक्ष से निकलकर सीधे अपने पिता श्री के कक्ष में पहुंची।' जहां पर वेद ऋषि महाराज युद्ध बाण का उपचार कर रहे थे। महाराज अपने शाही पलंग पर लेट कर उन्हें एक टक देख रहे थे।"'राजकुमारी नेत्रा ने वेद ऋषि जी के पास आकर उन्हें प्रणाम किया और आगे कहने लगी -"प्रणाम ! वेद ऋषि जी अब पिता श्री का स्वास्थ्य कैसा है?""प्रणाम! राजकुमारी अब आपके पिताश्री का स्वास्थ्य स्थिर है, लेकिन कुछ समय लगेगा उन्हें पूर्ण रूप से स्वस्थ होने में परंतु वह स्वस्थ हो जाएंगे। उन्हें बस आपके प्यार और साथ की जरूरत