मायके की देहलीज़ - भाग 1

शादी के तीन साल बाद जब नेहा अपने गांव वाले पुश्तैनी घर पहुंची, तो उसकी सांसों में बचपन की वही पुरानी और जानी-पहचानी खुशबू भर गई। गाड़ी से उतरते ही उसने देखा कि मां दरवाजे पर कब से खड़ी उसी की राह तक रही थीं। नेहा बिना पल गंवाए दौड़कर मां के गले से लिपट गई। मां ने उसके माथे को चूमते हुए अपनी छाती से लगा लिया और उनकी आंसुओं से भरी आंखों में एक असीम सुकून तैरने लगा। पापा के अचानक चले जाने के बाद मां के उदास चेहरे पर ऐसी सच्ची खुशी नेहा ने बरसों बाद देखी