सुबह के करीब दस बज रहे थे.अंजलि अपने कमरे में बैठी थी, लेकिन उसका ध्यान किसी काम में नहीं लग रहा था.कल रात से उसके मन में सिर्फ एक ही बात चल रही थी.राहुल.वह आदमी जो अचानक उसकी जिंदगी में वापस आया था.वह राहुल को देखती थी तो उसके दिल को अजीब- सा सुकून मिलता था.उसकी आवाज जानी- पहचानी लगती थी.उसकी मुस्कान जानी- पहचानी लगती थी.उसका बात करने का तरीका भी उसे अपना लगता था.लेकिन चेहरे पर घनी दाढी और मूंछ होने की वजह से अंजलि उसे ठीक से पहचान नहीं पा रही थी.वह कई बार राहुल को ध्यान से