Aashi कुछ देर तक उस तारीख को देखती रही।22 August.सिर्फ दो शब्द और कुछ अंक थे, लेकिन उसके लिए वो तारीख किसी बंद दरवाज़े की तरह थी।ऐसा दरवाज़ा, जिसे उसने बहुत पहले बंद कर दिया था।उसने डायरी को धीरे से पलटा।कुछ पन्ने खाली थे। कुछ पर अधूरी कविताएँ थीं। कहीं-कहीं छोटी-छोटी बातें लिखी थीं, जिन्हें पढ़कर उसे अपना पुराना रूप याद आ रहा था।एक पन्ने पर लिखा था—“कभी-कभी हम किसी चीज़ को इसलिए नहीं छोड़ते क्योंकि हमें उससे प्यार नहीं रहा… बल्कि इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि उससे जुड़ी याद बहुत भारी हो जाती है।”Aashi की आँखें उस लाइन पर टिक