एक जादूगर

एक जादूगरलेखक: विजय शर्मा एरीशहर के बीचोंबीच खड़ा था एक पुराना स्कूल—सरस्वती विद्या मंदिर। दीवारें धूसर, छत पर बारिश की बूँदें रिसती हुई, और गलियारे इतने लंबे कि शाम को उनमें अँधेरा घुल जाता था। बच्चे कहते थे कि रात में यहाँ कोई घूमता है। अध्यापक कहते थे कि बस पुरानी इमारत की आवाज़ें हैं। लेकिन एक लड़का था—आरव—जिसने उस गलियारे में जादू देखा था।आरव बारह साल का था। माँ की मृत्यु के बाद पिता ने उसे इस स्कूल में दाखिल कराया था। पिता दिन-रात फैक्ट्री में काम करते थे, घर में सिर्फ दादी रहती थीं। आरव चुपचाप रहता था।