अधूरी किताबएपिसोड 72 — कहानीकार का वारिसअर्णव की आँखों में सुनहरी रोशनी जल उठी।कुछ सेकंड तक कोई कुछ नहीं बोला।नैना डरकर उसके पास गई।“अर्णव...?”अर्णव ने उसकी तरफ देखा, लेकिन उसकी आँखों की चमक अभी भी वैसी ही थी।उसने अपनी हथेली खोली।उसकी हथेली के बीचों-बीच एक छोटा-सा काला निशान उभर आया था।ठीक वैसा ही निशान...जो किताब के पहले पन्ने पर बना हुआ था।कबीर ने उसे देखते ही पीछे कदम बढ़ा लिया।“नहीं...”अर्णव ने उसकी तरफ देखा।“क्या हुआ?”कबीर की आवाज काँप रही थी।“अब सब समझ आ गया।”अनन्या ने पूछा—“क्या?”कबीर ने किताब उठाई और उस तस्वीर की तरफ इशारा किया जिसमें अर्णव का चेहरा