एक पिता का आखिरी वादा

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दीवार पर लगी पुरानी घड़ी कई साल पहले ही बंद हो चुकी थी, लेकिन राघव ने उसे कभी दीवार से नहीं उतारा।हर सुबह काम पर जाने से पहले वह कुछ पल उस घड़ी को जरूर देखता था।उसे उस समय की याद आती थी, जब उसके बच्चे छोटे थे।तब उसका घर बच्चों की आवाजों से भरा रहता था।उसकी बेटी मीरा छोटे-छोटे कदमों से आँगन में दौड़ती रहती थी और उसका बेटा अर्जुन उसके पीछे भागता हुआ उसकी लकड़ी की खिलौना गाड़ी छीनने की कोशिश करता था। उनकी माँ सीता रसोई के दरवाजे के पास बैठकर दोनों की नोकझोंक देखकर मुस्कुराती रहती