DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 1.

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रात कितनी ही घनी और गहरी हो, सुबह का सूरज तो निकलना ही है। हर रोज़ की तरह आज भी सुबह हुई, आज की सुबह का सूरज सबके लिए अम्नो-सुकून की वजह बना।वो फिजाएं जिन्हें सूरज के छुप जाने से खुले आम सड़को और रास्तों पर ठिठोलियां करने का हौसला मिला था वो अब थमने लगी, कमज़ोर पड़ने लगी। कभी ये सूरज जो लोगों को बेहाल करता था आज इसी से शहर वालों को सुकून मिलने लगा। सागर भाई भी अपने सिपाहियों के साथ मुख्य दरवाज़े पर धूप के तले खड़े उन्हें आज का र्देस देने लगे।उनका हाव-भाव, तेज और उनका