घुमक्कड़

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घुमना तो अच्छा होता ही है बसर्ते घुमने को घुमने जैसा घुमा जाए। न कोई काम का बोझ, न दिमाग पर कोई बोझ ओर न हाथ में किसी भारी सामान का बोझ। घुमना मतलब कहीं जल्दी पहुंचना नहीं बल्कि धीरे-धीरे चलना और मन-मस्तिष्क में हलचल मचाने वाली हर चीज का अवलोकन। कोई घटना जो मन पे अपनी छाप छोड़ दे, उसके बारे में सोचना, उत्सुकता के साथ अनुभव भी बढ़ाता है।मंगरू की ऐसी ही सोच थी, अपनी इसी सोच के बारे में लोगों को बताता रहता था। कभी किसी दिन ऐसा नहीं हुआ कि वो घुमने नहीं गया। मगर ये