चारों तरफ पसरा गहरा, बेआवाज़ सन्नाटा और उस सन्नाटे को चीरती ठंडी हवा। आसमान की स्याह चादर पर दूर कहीं एक चमकता चाँद और उसकी महफ़िल सजाए अनगिनत टिमटिमाते सितारे। यह कोई तन्हाई नहीं, बल्कि एक ऐसा सुकून भरा लम्हा है जहाँ दुनिया का सारा शोर थम चुका है। दिन के सारे नक़ाब उतर चुके हैं, सारी दौड़-भाग ख़त्म हो चुकी है। इस अँधेरी रात की छांव में बैठना खुद से रूबरू होने जैसा है। चाँद की मद्धम रोशनी उन अनकहे ख़यालों पर पड़ती है जिन्हें हम दिन के उजाले में छुपाए फिरते हैं। सितारे जैसे चुपचाप गवाही दे रहे हो