जल की कलकल करती जलधारा प्रबल वेग से बढ़ रही थी। पत्थर पर जल का प्रहार लगातार हो रहा था। यहाँ-वहाँ अटकी हुई जलकुम्भी भी जकड़न से मुक्त हो बह रहा था। छोटे बच्चे बड़ी सावधानी से अपनी कागज की नाव पानी में छोड़ रहे थे। अपनी-अपनी नाव से आगे बढ़ने की प्रसन्नता और उत्सुकता लिए हुए थे। नदी किनारे पत्थर पर विराजमान प्रेमी युगल श्याम और मंजरी नयन की भाषा को समझने और समझाने में मग्न थे। कभी-कभी उनका ध्यान विशाल जलराशि की ओर चला जा रहा था। उन दोनों के मन-मस्तिष्क में भी लहरों का शोर