सूरतगढ़ कस्बे में एक मध्यवर्गीय परिवार रहता था, जिनका अपना पुस्तेनी पंसारी का काम था,कस्बे में सेठ का नाम था.काम भी बहुत अच्छा था, सेठ के एक बेटा और एक बेटी थी.सेठ को खाना बनाने का व खिलाने का बहुत शौक था, कस्बे के लोग सेठ को अक्सर खाना कैसा बना हैं, चेक करवाने के लिए बुलाते थे,व्यापारी सेठ तन मन से आयोजन को सफल बनाने में भी पूरा सहयोग करते थे.सेठ तीन भाइयों में सबसे बड़े थे सबके अपने अपने मकान व दुकान थी, ईश्वर का सभी भाइयों पर पूरा आशीर्वाद था.सेठ ने अपने बड़े बेटे की शादी बड़े