कौशल राज की विशाल राजसभा में, जब स्वर्णिम राज से लाई गई एक-से-एक सुंदर और बेशकीमती भेंटों को प्रस्तुत किया गया, तो वहाँ बैठे सभी मंत्री और दरबारी आश्चर्यचकित रह गए।किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि महारानी सुलोचना, राजकुमार अक्षतयम के लिए इतनी ढेरों और भव्य भेंटें भेजेंगी। कक्ष में रखी उन अनमोल वस्तुओं की चमक हर किसी की आँखों को चौंधिया रही थी।सभी भेंटों का प्रदर्शन पूरा होने के बाद, दूत जी ने आदरपूर्वक आगे बढ़कर रानी सुलोचना जी का भेजा हुआ वह महत्वपूर्ण पैगाम पढ़ना शुरू किया।जैसे ही दूत जी ने पैगाम पढ़ा और सबने सुना