होटल 'द इंपीरियल पैलेस' का भव्य संगमरमरी पोर्च रात की दुधिया रोशनी में नहाया हुआ था। शहर की नामी हस्तियां, मीडिया के कैमरे और दौलत की नुमाइश करते रईसों का हुजूम वहां मौजूद था। उसी चमक-दमक के बीच, ऑटो स्टैंड के पास अपने पुराने घिसे हुए जूतों और सादे कपड़ों में आकाश शाक्य शांत खड़ा था। उसके चेहरे पर न कोई घबराहट थी, न ही कोई हीनभावना। उसकी पैंट की जेब में एक ऐसा राज़ छिपा था, जो उस पूरी इमारत की कीमत चुकता कर सकता था—अमेरिकन एक्सप्रेस का दुर्लभ ब्लैक टाइटेनियम सेंटूरियन कार्ड।होटल के विशाल शीशे के दरवाज़े अचानक